विशेष टिप्पणी
डायमंड शुक्ला संपादक
मिशन क्रांति न्यूज
मिशन क्रांति न्यूज@जांजगीर-चाम्पाA
विकसित व विकासशील देश की कल्पना लिए भारत नित नए विकास के साथ भले ही नवनिर्माण की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है लेकिन क्या इतने दशक बाद भी किसानों के हालात बदले,,, सिर्फ चंद योजनाएं लागू कर देने से क्या उसकी स्थिति बदल जाएगी,,, सरकार उद्योग लगाने से लेकर हर काम के लिए बैंकों के जरिए कर्ज दिलाने भरसक प्रयास कर रही है जिसका लाभ उद्ययमियों को बखूबी मिल रहा है,,,कहीं सब्सीडी का खेल तो कहीं आपसी तालमेल से बैंक प्रबंधक ों द्वारा महज टारगेट पूरा करने सरकारी पैसों का बंदरबाट,,,जिसका ताजा उदाहरण हमारे देश में कई बार सुनने व जानने को मिला है,,एक उद्योगपति विजय माल्या जहां हजारों करोड रूपए लेकर देश से चंपत हो जाता है और सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगती,,,, वहीं कई किसान जिन्होंने खेती के लिए बैंकों से महज चंद रकम कर्ज ले रखे हैं उनके यहां बैंक कर्मियों की दबिश इतनी कि वे मानसिक रूप से खुद को प्रताडित समझते हैं पर वे सीधे साधे किसान किसी से शिकवा शिकायत करने की बजाय अपने स्तर पर मामला निपटाकर शीघ्र कर्ज अदायगी का आश्वासन देता है ताकि उनकी प्रतिष्ठा दांव में मत लग जाए,,, विडम्बना तो यह है कि देश में सिर्फ किसानों का शोषण जारी है केंद्र सरकार ने तकरीबन 15 उद्योगपतियों का कर्ज माफ कर दिया,,, लेकिन देश के श्रमवीर अन्नदाता किसान जो कि कठिन परिश्रम कर अपनी गाढी मेहनत की कमाई से सबका पेट भर रहे हैं उनका ना तो कभी कर्ज माफ किया जाता है और ना उन्हें कर्ज अदायगी में किसी तरह की रियायत दी जाती है,,,नेता जो कि खुद को किसान हितैषी बताते हैं वे उस वक्त कहां नदारद हो जाते हैं जब कर्ज से लदा किसान आत्महत्या के लिए बाध्य हो जाता है हालांकि यह किसान की कमजोरी है लेकिन सरकार को किसानों के प्रति उदारता दिखाने की जरूरत है,,, जो भरे बरसात, कडाके की ठंड व तपते धूम में खेती किसानी कर अन्न उपजाता है और सबका पेट भरते हैं पर आज पर्यंत कोई विशेष कारगर योजना किसानों के हित में नहंी बनी जिससे किसानों के हालात बदलते,,,,सरकार की आखिर मंशा क्या है,,,यह समझ से परे है,,, वहीं किसान नेता जो उनके हिमाकत करतेे नजर आते हैं वे भी महज राजनीतिक रोटी सेंकने किसानों के वोटों का सहारा व किसानों के जनाधार का फायदा उठाते हैं पर किसानों को हर बार झूठा आश्वासन व उनके हाथ में सिर्फ झूनझूना थमा दिया जाता है,,,सरकारी अमले,व्यापारी,उद्योगपति, जनप्रतिनिधि, ट्रांसपोर्टर, कालोनाईजर व ठेकेदार सहित अन्य क्षेत्रों में कार्यरत सभी लोगों के हालात बदले हैं और वे जमीन से उठकर एक नए आयाम तय कर साधन संसाधन से परिपूर्ण जीवनयापन कर रहे हैं लेकिन आज भी भारत जहां 80 फीसदी किसान जो कि गावों में बसते हैं और खेती से उनका गुजर बसर होता है उनके हालात आज पर्यंत नहंी बदला,,,आखिर किसानों की दशा व दिशा के बारे में कोई सोचता क्यों नहीं यह एक बडा सवाल है जिसका जवाब देने अधिकारी व बडे बडे नेता कतराते हैं,,, जिससे किसान गरीबी में जीवनयापन करने मजबूर है।

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