⇛ विभागीय अमला शासन की महती योजना के क्रियान्वयन में भी बरत रहे घोर लापरवाही
मिशन क्रांति न्यूज जांजगीर-चाम्पा। ग्रामीणों को गांव में ही काम उपलब्ध कराने की मंशा से शुरू की गई महात्मा गांधी रोेजगार गारंटी योजना का काम इस वित्तीय वर्ष ऐसे रोजगार सहायकों के भरोसे कराया जा रहा है जिनकी सेवा वृदिध अब तक बढाई ही नहीं जा सकी है। ऐसे में सरकारी काम पर सवालिया निशान उठने लगा है, क्योंकि आंकडों पर जाएं तो मनरेगा के काम में ही सबसे अधिक फर्जीवाडा हुआ है,,,इसके बावजूद मनरेगा का काम गैर जिम्मेदार लोगों से कराया जा रहा है, जो विभागी अमलों की घोर लापरवाही को उजागर करता है। बहरहाल मनरेगा का काम धडल्ले जारी है और विभाग तमाशबीन की तरह चुप्पी साधे हुए हैं।
जिले के तकरीबन 631 ग्राम पंचायतों के लगभग ज्यादातर गांवों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब गहरीकरण,सडक निर्माण, व नया तालाब निर्माण सहित कई अन्य काम कराए जा रहे है लेकिन इस साल मनरेगा के काम में ऐसे लोगांे को जिम्मेदारी सौंपी गई है,,, जिन रोजगार सहायकों की अब तक सेवा वृदिध ही नहीं बढ पाई है जिससे वे काम कराने अधिकृत ही नहीं है, ऐसे में वे बेरोकटोक लाखों का काम करा रहे हैं,, अब सवाल यह उठता है कि यदि उक्त कामों में किसी तरह की बडी गड़बड़ी अथवा फर्जीवाड़ा का खेल हुआ तो उसके लिए आखिर विभागीय अमला किसको जिम्मेदार ठहराएंगे,,हालंाकि मनरेगा के काम की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत होता है लेकिन कार्य स्थल पर मजूदरी की उपस्थिति से लेकर मस्टर रोल भरना व मनरेगा के संपूर्ण कामकाज की जिम्मेदारी रोजगार सहायक का होता है, यदि बगैर पुर्न नियुक्ति के कामकाज संभालने वाले रोजगार सहायकों द्वारा किसी तरह अनियमितता बरती जाती है तो इसके लिए आखिर विभागीय अमला किसको जिम्मेदार मानेंगे,,यह एक बडा सवाल है लेकिन इसके बावजूद आंख मूंदकर जिम्मेदार अधिकारी इस काम को बेरोकटोक अमलीजामा पहनाने लगे हैं, बहरहाल बात जो भी हो लेकिन जिले के पूरे 9 ब्लाक के ज्यादातर ग्राम पंचायत में मनरेगा का काम किया जा रहा है। जिसकी नजर किसी की नहीं पडी है हालांक कुछ जानकार दबी जुबान से इस बात को अनुचित ठहरा रहे हैं पर इसकी ना तो अब तक शिकायत हुई है और ना ही विभागीय अमला इसे गंभीरता स ेले रही है क्योंकि उन्हें इस बात की जरा भी फिक्र नहीं कि कामकाज के दौरान यदि किसी तरह अनियमितता आती है तो उसके लिए दोषी किसे माना जाएगा और कार्रवाई की गाज किस पर गिरेगी। बहरहाल जिम्मेदार अफसरों की वजह से इस तरह केंद्र सरकार की महती योजना का भी हाल बेहाल है जहां मनमाने ढंग से अपनी सुविधानुसार अफसर काम करा रहे हैं जिसका ताजा उदाहरण यही है कि रोजगार सहायकों की सेवावृदिध नहीं बढ़ पाई है और काम धडल्ले से जारी हैं।
मनरेगा के काम में गड़बड़ी होने पर कौन होगा दोषी
महात्मा गांधी का काम सुचारू ढंग से चले इसके लिए बकायदा हर ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायकों की नियुक्ति की गई है,चूंकि ये संविदा कर्मचारी हैं,जिनकी हर साल 28 फरवरी को सेवा समाप्त हो जाती है उसके बाद पुनः कामकाज सही पाए जाने पर सेवा वृदिध बढा दी जाती है लेकिन इस वित्तीय वर्ष रोजगार सहायकों की सेवा वृदिध अब तक नहीं बढाए जाने की बात सामने आ रही है पर मजे की बात तो यह है कि इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों की शह पर रोजगार सहायक मनमाने ढंग से मनरेगा का काम करा रहे हैं ऐसे में अनियमितता व गडबडी में दोषी किसे माना जाएगा और कार्रवाई किस पर होगी। यह संशय बरकरार है।
सरपंच और सचिव की गैरमौजूदगी में होता है मनरेगा का काम
ज्यादातर पंचायतों में गांधी रोजगार गांरटी योजना का काम गैरमौजूदगी में होता है क्योंकि सरपंच व सचिव मनरेगा के कामकाज की संपूर्ण जिम्मेदारी रोज मेंगार सहायक को सौंप दिए रहते हैं ऐसे में वे अपनी जवाबदारी से मुंह मोड लेते हैं जिसके चलते रोजगार सहायक मेट के जरिए मनमाने ढंग से काम कराता है कई बार लापरवाही के चलते अनियमिता की शिकायतें सामने आती है और इसका खामियाजा सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक सहित मजदूरों को भुगतना पडता है,,मजदूरों की समय पर मजदूरी भुगतान नहीं हो पाता है। यह सब सरपंच व सचिव की गैरमौजूदगी के चलते होता है,वहीं इस साल तो बिना सेवा वृदिध बढे रोजगार सहायक काम करा रहे हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मनरेगा का कामकाज किस ढंग से कराया जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
रोजगार सहायकों की नियुक्ति के संबंध में पूछे जाने पर मनरेगा के एपीओ विजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें रोजगार सहायकों की नियुक्ति के संबंध में किसी तरह की जानकारी नहीं है,चूंकि रोजगार सहायक का नियोक्ता जनपद सीईओ होता है,,,हालांकि महात्मागांधी रोजगार गारंटी योजना का काम पंचायतों में रोजगार सहायकों द्वारा कराया जा रहा है। जनपदों से किसी तरह रोजगार सहायकों की नियुक्ति के संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मिशन क्रांति न्यूज जांजगीर-चाम्पा। ग्रामीणों को गांव में ही काम उपलब्ध कराने की मंशा से शुरू की गई महात्मा गांधी रोेजगार गारंटी योजना का काम इस वित्तीय वर्ष ऐसे रोजगार सहायकों के भरोसे कराया जा रहा है जिनकी सेवा वृदिध अब तक बढाई ही नहीं जा सकी है। ऐसे में सरकारी काम पर सवालिया निशान उठने लगा है, क्योंकि आंकडों पर जाएं तो मनरेगा के काम में ही सबसे अधिक फर्जीवाडा हुआ है,,,इसके बावजूद मनरेगा का काम गैर जिम्मेदार लोगों से कराया जा रहा है, जो विभागी अमलों की घोर लापरवाही को उजागर करता है। बहरहाल मनरेगा का काम धडल्ले जारी है और विभाग तमाशबीन की तरह चुप्पी साधे हुए हैं।जिले के तकरीबन 631 ग्राम पंचायतों के लगभग ज्यादातर गांवों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब गहरीकरण,सडक निर्माण, व नया तालाब निर्माण सहित कई अन्य काम कराए जा रहे है लेकिन इस साल मनरेगा के काम में ऐसे लोगांे को जिम्मेदारी सौंपी गई है,,, जिन रोजगार सहायकों की अब तक सेवा वृदिध ही नहीं बढ पाई है जिससे वे काम कराने अधिकृत ही नहीं है, ऐसे में वे बेरोकटोक लाखों का काम करा रहे हैं,, अब सवाल यह उठता है कि यदि उक्त कामों में किसी तरह की बडी गड़बड़ी अथवा फर्जीवाड़ा का खेल हुआ तो उसके लिए आखिर विभागीय अमला किसको जिम्मेदार ठहराएंगे,,हालंाकि मनरेगा के काम की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत होता है लेकिन कार्य स्थल पर मजूदरी की उपस्थिति से लेकर मस्टर रोल भरना व मनरेगा के संपूर्ण कामकाज की जिम्मेदारी रोजगार सहायक का होता है, यदि बगैर पुर्न नियुक्ति के कामकाज संभालने वाले रोजगार सहायकों द्वारा किसी तरह अनियमितता बरती जाती है तो इसके लिए आखिर विभागीय अमला किसको जिम्मेदार मानेंगे,,यह एक बडा सवाल है लेकिन इसके बावजूद आंख मूंदकर जिम्मेदार अधिकारी इस काम को बेरोकटोक अमलीजामा पहनाने लगे हैं, बहरहाल बात जो भी हो लेकिन जिले के पूरे 9 ब्लाक के ज्यादातर ग्राम पंचायत में मनरेगा का काम किया जा रहा है। जिसकी नजर किसी की नहीं पडी है हालांक कुछ जानकार दबी जुबान से इस बात को अनुचित ठहरा रहे हैं पर इसकी ना तो अब तक शिकायत हुई है और ना ही विभागीय अमला इसे गंभीरता स ेले रही है क्योंकि उन्हें इस बात की जरा भी फिक्र नहीं कि कामकाज के दौरान यदि किसी तरह अनियमितता आती है तो उसके लिए दोषी किसे माना जाएगा और कार्रवाई की गाज किस पर गिरेगी। बहरहाल जिम्मेदार अफसरों की वजह से इस तरह केंद्र सरकार की महती योजना का भी हाल बेहाल है जहां मनमाने ढंग से अपनी सुविधानुसार अफसर काम करा रहे हैं जिसका ताजा उदाहरण यही है कि रोजगार सहायकों की सेवावृदिध नहीं बढ़ पाई है और काम धडल्ले से जारी हैं।
मनरेगा के काम में गड़बड़ी होने पर कौन होगा दोषी
महात्मा गांधी का काम सुचारू ढंग से चले इसके लिए बकायदा हर ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायकों की नियुक्ति की गई है,चूंकि ये संविदा कर्मचारी हैं,जिनकी हर साल 28 फरवरी को सेवा समाप्त हो जाती है उसके बाद पुनः कामकाज सही पाए जाने पर सेवा वृदिध बढा दी जाती है लेकिन इस वित्तीय वर्ष रोजगार सहायकों की सेवा वृदिध अब तक नहीं बढाए जाने की बात सामने आ रही है पर मजे की बात तो यह है कि इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों की शह पर रोजगार सहायक मनमाने ढंग से मनरेगा का काम करा रहे हैं ऐसे में अनियमितता व गडबडी में दोषी किसे माना जाएगा और कार्रवाई किस पर होगी। यह संशय बरकरार है।
सरपंच और सचिव की गैरमौजूदगी में होता है मनरेगा का काम
ज्यादातर पंचायतों में गांधी रोजगार गांरटी योजना का काम गैरमौजूदगी में होता है क्योंकि सरपंच व सचिव मनरेगा के कामकाज की संपूर्ण जिम्मेदारी रोज मेंगार सहायक को सौंप दिए रहते हैं ऐसे में वे अपनी जवाबदारी से मुंह मोड लेते हैं जिसके चलते रोजगार सहायक मेट के जरिए मनमाने ढंग से काम कराता है कई बार लापरवाही के चलते अनियमिता की शिकायतें सामने आती है और इसका खामियाजा सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक सहित मजदूरों को भुगतना पडता है,,मजदूरों की समय पर मजदूरी भुगतान नहीं हो पाता है। यह सब सरपंच व सचिव की गैरमौजूदगी के चलते होता है,वहीं इस साल तो बिना सेवा वृदिध बढे रोजगार सहायक काम करा रहे हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मनरेगा का कामकाज किस ढंग से कराया जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
रोजगार सहायकों की नियुक्ति के संबंध में पूछे जाने पर मनरेगा के एपीओ विजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें रोजगार सहायकों की नियुक्ति के संबंध में किसी तरह की जानकारी नहीं है,चूंकि रोजगार सहायक का नियोक्ता जनपद सीईओ होता है,,,हालांकि महात्मागांधी रोजगार गारंटी योजना का काम पंचायतों में रोजगार सहायकों द्वारा कराया जा रहा है। जनपदों से किसी तरह रोजगार सहायकों की नियुक्ति के संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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