रविवार, 23 अप्रैल 2017

मनरेगा के काम में मजदूरी भुगतान की लेटलतीफी से मजदूर बना रहे दूरी,,,,पलायन रोकने सरकार नाकाम,,,प्रशासन के पास रिकार्ड तक नहीं !

मिशन क्रांति न्यूज @

 जांजगीर-चाम्पा।
गावों से पलायन रोकने शासन प्रशासन पुरी तरह नाकाम है जिससे हर रोज ग्रामीण मजदूरी के लिए पलायन कर रहे हैं,,, वहीं  विडम्बना तो यह है कि प्रशासन के पास पलायन का कोकई रिकार्ड तक नहीं है,,, ऐसे में मजदूर काम की तलाश में दूसरे राज्य पलायन करने मजबूर हैं मजदूरों को ग्रामीण स्तर पर काम दिलाने शुरू की गई महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना भी मजदूरों के लिए कारगर साबित नहीं हो रहा है,,, क्योंकि मनरेगा में काम करने के बाद भी लंबे समय तक मजदूरी भुगतान नहीं होने से मजदूरों को इस योजना से मोह भंग हो रहा है,,वहीं  श्रम विभाग के आला अधिकारी पलायन रोकने महज औपचारिकता निभा  रहे हैं। जिससे पलायन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है,,,
शासन की मंशानुरूप गांव के मजदूरों को ग्रामीण स्तर पर ही काम दिलाने शुरू की गई महात्मागांधी रोजगार गांरटी योजना फिसडडी साबित हो रही है,,, क्योंकि इस योजना में काम करने वाले मजदूरों को अब तक मजदूरी भुगतान नहीं हो पाया है,,,वहीं अब तक ज्यादातर पंचायतों में अब तक मनरेगा के तहत किसी तरह का काम शुरू नहीं हो पाया है ऐसे में उनके सामने रोजी रोटी की समस्या खडी हो गई है,,, और वे काम की तलाश में अन्य राज्य पलायन कर रहे हैं,,,मिशन क्रांति न्यूज  की टीम ने जब नवागढ, मालखरौदा व जैजैपुर सहित अन्य कई ब्लाक के गावों के मजदूरों से पलायन के संबंध में बात किया तो नवागढ ब्लाक के तुलसी के कुशवा केंवट, राजकुमार कश्यप व अन्य कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने गांव में मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण में काम किया था लेकिन अब तक उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है,,इसी तरह अन्य ग्राम पंचायतों में भी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत सडक निर्माण सहित अन्य कई काम कराया गया था लेकिन कई गावों में अब तक मजदूरों का भुगतान नहीं हो पाया है ऐसे में उनके सामने आर्थिक समस्या खडी हो गई है,,,जिससे वे पलायन करने मजबूर हैं,विडम्बना तो यह है कि जिले में कितने मजदूर पलायन कर गए हैं इसकी पुख्ता जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है,,, ऐसे में जब बंधक मजदूर के मामले जब सामने आते हैं तो पलायन किए गए लोगों की सूध ली जाती है और तत्काल पलायनकर्ताओं की जानकारी जुटा पाना मुश्किल हो जाता है पर इससे शासन प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है जिससे  पलायन का रिकार्ड नहीं होने के बावजूद आला अफसर बडे इत्मिनान से चुप्पी साधे बैठे हैं।
हर साल मुक्त कराए जाते हैं बंधक मजदूर
विभागीय आंकडों के अनुसार जिले में हर साल अलग अलग ब्लाक से बंधक मजदूर मुक्त कराए जाते हैं ये मजदूर ज्यादातर ईंट भटठा व मकान निर्माण में कार्य करते हैं लेनदेन में विवाद की स्थिति में ये मजदूर बंधक बना लिए जाते हैं और फिर इनके परिजनों या संबंधितों द्वारा प्रशासन स्तर पर इन्हें छुडवाने प्रशासन से गुहार लगाई जाती है तब जाकर किसी तरह इन बंधक मजदूरों को मुक्त कराया जाता है इसके बावजूद ना तो पलायन करने मजदूर बात आ रहे हैं और ना ही पलायन का रिकार्ड दुरूस्त करने प्रशासन स्तर पर किसी तरह की कार्ययोजना बन पा रही है।
मनरेगा से मजदूरों का मोहभंग 
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में जहां पहले काम की मांग के लिए पंचायतों में अर्जी लगाई जाती है,,,उसके बाद कार्य की मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू किया जाता है लेकिन काम पूर्ण होने के कई महिने बाद भी मजदूरों को मजदूरी भुगतान नहीं हो पाता,,, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी से जूझना पडता है,,, इसके बावजूद उन्हें भुगतान नहीं होने पर वे मनरेगा में काम कराना मुनासिब नहीं समझते और काम के लिए अन्य प्रांतों की ओर रूख करते हैं। जहां उन्हें कई तरह की परेशानियां होती है। पर सरकार व प्रशासनिक अमलों की लापरवाही के चलते इस योजना का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है जिससे यह योजना दम तोडते नजर आ रही है ।

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