जांजगीर-चांपा। होम लोन लेने वाले व्यक्ति का बीमा कराने के नाम पर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के चांपा ब्रांच द्वारा प्रीमियम की राशि जमा करा ली गई, लेकिन बीमा नहीं कराया गया, जिसके कारण अब बैंक को बीमा के रकम या पालिसी बांड एक माह के भीतर आवेदक को मय वादव्यय व मानसिक क्षतिपूर्ति के साथ भुगतान करना होगा। उपभोक्ता फोरम द्वारा दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया है।
आवेदक से मिले जानकारी के अनुसार सदर बाजार चांपा निवासी मामचंद श्रीवास ने सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के स्थानीय शाखा से दो लाख ५० हजार रुपए का होम लोन लिया था। लोन के कव्हर के लिए बैंक द्वारा बीमा कराया गया, जिसका भी किश्त उपभोक्ता के खाते से काट लिया गया। लोन का किश्त लगातार पटाया जा रहा था, लेकिन मामचंद की मृत्यु पश्चात उसके पुत्र अशोक श्रीवास ने सेंट्रल बैंक प्रबंधक से बीमा क्लेम करने आवेदन किया। बैंक प्रबंधक द्वारा बीमा संबंधी जानकारी को लेकर आवेदक को घुमाया जा रहा था और सूचना के अधिकार के तहत भी उसे जानकारी नहीं मिली। वहीं बैंक द्वारा भारतीय जीवन बीमा निगम के शहडोल शाखा से बीमा कराने की जानकारी के आधार पर वहां पत्र व्यवहार किया गया, जहां से भी कोई जवाब नहीं मिलने पर मामला उपभोक्ता फोरम में प्रस्तुत किया गया। भारतीय जीवन बीमा निगम के शहडोल शाखा से उपभोक्ता फोरम को जानकारी दी गई की, वहां संबंधित का बीमा नहीं कराया गया है। इसके बाद बैंक व आवेदक की दलील सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बीपी पांडेय, सदस्य मनरमण सिंह तथा मंजूलता राठौर ने फैसला सुनाया कि बैंक द्वारा आवेदक से बीमा पालिसी के एवज में लिए गए प्रीमियम के आधार पर बांड पेपर एक माह के भीतर प्रदान करे अन्यथा इंश्योरेंस कव्हर पत्र अनुसार इंश्योर्ड रकम एक लाख ५० हजार रुपए का भुगतान एक माह के भीतर करे। साथ ही आवेदक को वादव्यय बतौर तीन हजार तथा मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में २० हजार रुपए का भुगतान एक माह में करना होगा।
---------
आवेदक से मिले जानकारी के अनुसार सदर बाजार चांपा निवासी मामचंद श्रीवास ने सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के स्थानीय शाखा से दो लाख ५० हजार रुपए का होम लोन लिया था। लोन के कव्हर के लिए बैंक द्वारा बीमा कराया गया, जिसका भी किश्त उपभोक्ता के खाते से काट लिया गया। लोन का किश्त लगातार पटाया जा रहा था, लेकिन मामचंद की मृत्यु पश्चात उसके पुत्र अशोक श्रीवास ने सेंट्रल बैंक प्रबंधक से बीमा क्लेम करने आवेदन किया। बैंक प्रबंधक द्वारा बीमा संबंधी जानकारी को लेकर आवेदक को घुमाया जा रहा था और सूचना के अधिकार के तहत भी उसे जानकारी नहीं मिली। वहीं बैंक द्वारा भारतीय जीवन बीमा निगम के शहडोल शाखा से बीमा कराने की जानकारी के आधार पर वहां पत्र व्यवहार किया गया, जहां से भी कोई जवाब नहीं मिलने पर मामला उपभोक्ता फोरम में प्रस्तुत किया गया। भारतीय जीवन बीमा निगम के शहडोल शाखा से उपभोक्ता फोरम को जानकारी दी गई की, वहां संबंधित का बीमा नहीं कराया गया है। इसके बाद बैंक व आवेदक की दलील सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बीपी पांडेय, सदस्य मनरमण सिंह तथा मंजूलता राठौर ने फैसला सुनाया कि बैंक द्वारा आवेदक से बीमा पालिसी के एवज में लिए गए प्रीमियम के आधार पर बांड पेपर एक माह के भीतर प्रदान करे अन्यथा इंश्योरेंस कव्हर पत्र अनुसार इंश्योर्ड रकम एक लाख ५० हजार रुपए का भुगतान एक माह के भीतर करे। साथ ही आवेदक को वादव्यय बतौर तीन हजार तथा मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में २० हजार रुपए का भुगतान एक माह में करना होगा।
---------
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें